भक्ति की शक्ति
संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से एक योगी ने योगबल से संकल्प करके अपना सूक्ष्म शरीर निकाला और भगवान विष्णु के लोक में गया। वहाँ जाकर उसने भगवान से कहाः “मुझे आपकी प्रेमाभक्ति दे दो।” भगवानः “योगी ! तुझे चाहिए तो राज्य दे दूँ। अरे, तुझे चक्रवर्ती सम्राट बना दूँ।” योगीः “नहीं, प्रभु ! …