ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

चिदानंदरूपः शिवोઽहं शिवोઽहं….


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से ध्यानयोग शिविर में निःसृत पूज्यश्री की आत्मस्पर्शी अमृतवाणी श्री भोले बाबा ने कहा हैः पृथ्वी नहीं जल नहीं, नहीं अग्नि तू नहीं है पवन। आकाश भी तू है नहीं, तू नित्य है चैतन्यघन।। इन पाँचों का साक्षी सदा, निर्लेप है तू सर्व पर। निज रूप को पहिचानकर, हो …

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साधक सिद्ध कैसे बने ?


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से साधारण से दिखनेवाले मनुष्य में इतनी शक्तियाँ छुपी हुई हैं कि वह हजारों जन्मों के कर्मबन्धनों और पाप-तापों को काटकर अपने अजन्मा, अमर आत्मा में प्रतिष्ठित हो सकता है। मनुष्य तो क्या, यक्ष, गंधर्व, किन्नर एवं देवता भी उसका दर्शन पाकर तथा यशोगान करके अपना भाग्य बनाने …

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भगवान का अनुभव कैसे ?


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से परमात्मा कैसा है ? आत्मा का स्वरूप क्या है ? कोई कहता है कि भगवान तो मोरमुकुटधारी हैं। कोई कहता है कि भगवान तो मर्यादापुरुषोत्तम हैं। कोई कहता है कि भगवान सर्वगुणसम्पन्न हैं। कोई कहता है कि भगवान सर्वशक्तिमान हैं। कोई कहता है कि भगवान सर्वत्र हैं। कोई …

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