ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आओ विचार करें कि ईश्वर कैसा है !


यह परमात्मा क्या है ? ज्ञान के सिवाय और कुछ की कल्पना छोड़ दो, बिल्कुल साक्षात् अपरोक्ष है । ज्ञान के सिवाय बाहर कोई विषय है या भीतर विषय है, यह कल्पना छोड़ दो । बाहर भीतर तो कल्पित है ज्ञान में । ज्ञान में बाहर-भीतर की एक आकृति समायी हुई है, वह तो ज्ञान …

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परिप्रश्नेन….


साधकः गुरुदेव ! मन को मारना चाहिए या मन से दोस्ती करनी चाहिए ? पूज्य बापू जीः मन से दोस्ती करेंगे तो ले जायेगा पिक्चर में, ले जायेगा ललना के पास, कहीं भी ले जायेगा मन तो । मन को मारोगे तो और उद्दंड होगा । मन से दोस्ती भी न करो, मन को मारो …

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जोंक नहीं, बछड़ा बन !


वासनावान लोगों की स्थिति समझाने के लिए महात्मा आनंद स्वामी अपने जीवन का एक प्रसंग बताते हुए कहते हैं- मैं छोटा सा था । एक गाय थी हमारे घर में । पिता जी ने कहाः “जा, उसे घुमा ला, पानी पिला ला ।” हमारे गाँव के पास एक तालाब था । गाय उसके किनारे-किनारे घूमने …

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