क्या महत्त्वाकांक्षी होना चाहिए ?
परमहंस योगानंद जी से उनके किसी शिष्य ने पूछाः “अपने लिए कार्य न करके सब कुछ ईश्वर के लिए करने का अर्थ क्या यह है कि महत्त्वाकांक्षी होना अनुचित है ?” योगानंद जीः “नहीं ! तुम्हें ईश्वर का कार्य करने के लिए महत्त्वाकांक्षी होना चाहिए । यदि तुम्हारा संकल्प निर्बल और तुम्हारी महत्त्वाकांक्षा मृत है …