ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

क्या महत्त्वाकांक्षी होना चाहिए ?


परमहंस योगानंद जी से उनके किसी शिष्य ने पूछाः “अपने लिए कार्य न करके सब कुछ ईश्वर के लिए करने का अर्थ क्या यह है कि महत्त्वाकांक्षी होना अनुचित है ?” योगानंद जीः “नहीं ! तुम्हें ईश्वर का कार्य करने के लिए महत्त्वाकांक्षी होना चाहिए । यदि तुम्हारा संकल्प निर्बल और तुम्हारी महत्त्वाकांक्षा मृत है …

Read More ..

चित्त में आत्मप्रसाद स्थिर करने में सहायक रात्रि


शरद पूर्णिमाः 30 व 31 अक्तूबर 2020 शरद पूनम को चन्द्रमा पृथ्वी के विशेष निकट होता है और बारिश के महीनों के बाद खुले आकाश में चन्द्रमा दिखे तो चित्त विशेष आह्लादित होता है । यह धवल (श्वेत) उत्सव है । ‘अपना अंतःकरण प्राकृतिक पदार्थों को सत्य मानकर मलिन न हो बल्कि जो सत्यस्वरूप सबमें …

Read More ..

2 प्रकार के भक्त – पूज्य बापू जी


2 प्रकार के भक्त होते हैं । एक होते हैं अहंनिष्ठ भक्त । वे सोचते हैं, ‘मैं पापी हूँ, क्या करूँ ? क्या मुँह दिखाऊँ ? कैसे प्रार्थना करूँ ? मैं ठीक हो जाऊँगा फिर भक्ति करूँगा, मेरी आदत ठीक हो जायेगी फिर मंत्रदीक्षा लूँगा….’ ऐसे अहंनिष्ठ व्यक्ति उलझ जाते हैं । दूसरे होते हैं …

Read More ..