ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जीवन बदलने का सामर्थ्य – पूज्य बापू जी


सिकंदर नरसंहार करता हुआ कुछ विशेष बनने की आशा लिए ईरान पहुँचा । ईरान के राजा भी हार गये । सेनापति और सैनिक लोग वहाँ का माल-खजाना लूटकर सुंदर-सुंदर सौगातें सिकंदर को भेंट करते जा रहे थे । हीरे-जवाहरात, स्वर्ण के अम्बार देखकर सिकंदर का मन खुशी से छलक उठा था, बोलाः “बड़ी विजय…., सुंदर …

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इससे सारी कुंजियाँ हाथ लगती जायेंगी – पूज्य बापू जी


सुबह उठो तो ऐसा चिंतन करते-करते ईश्वर में मन लगाओ कि ‘गोविन्दाय नमः । गो माने इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के द्वारा जो विचरण करेगा, अभी स्फुरित हुआ है, उसको मैं नमन करता हूँ । गोपालाय नमः । इन्द्रियाँ थक जायेंगी और रात को आ के उसमें डूबेंगी इसलिए गोपाल उसी का नाम है ।’ ऐसा करो …

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दोषों को नष्ट करने हेतु – पूज्य बापू जी


अपने में जो कमजोरी है, जो भी दोष है उनको इस मंत्र द्वारा स्वाहा कर दो । दोषों को याद करके मंत्र के द्वारा मन-ही-मन उनकी आहुति दे डालो, स्वाहा कर दो । मंत्रः ॐ अहं ‘तं’ जुहोमि स्वाहा । ‘तं’ की जगर पर विकार या दोष का नाम लें । जैसेः ॐ अहं ‘वृथावाणीं’ …

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