पूर्णता किससे – कर्मकाण्ड, योग या तत्त्वज्ञान से ? – पूज्य बापू जी
भगवान वेदव्यासजी के शिष्य थे जैमिनी । जैमिनी न अपने शिष्य को कर्मकाण्ड, यज्ञ-याग सिखाया और कहाः “वत्स ! अब तू स्वर्ग का अधिकारी हो गया ।” यज्ञ, जप-तप करने से बुद्धि पवित्र होती है । यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिनाम् ।। ‘यज्ञ, दान और तप – ये बुद्धिमान पुरुषों को पवित्र करने वाले हैं …