स्वामी राम को बंगाली बाबा ने वह दिया जिसे देने का कोई सोच भी नहीं सकता
गुरू के दिव्य कार्य हेतु शिष्य को मन, वचन और कर्म में बहुत ही पवित्र रहना चाहिये। गुरुभक्तियोग एक स्वतंत्र योग है।सद्गुरू के पवित्र चरणों में आत्मसमर्पण करना ही गुरुभक्तियोग की नींव है। अगर आपको सद्गुरू के जीवनदायक चरणो में दृढ श्रद्धा एवं भक्तिभाव होगा तो आपको गुरुभक्तियोग के अभ्यास में अवश्य सफलता मिलेगी।जब स्वामी …