Gurubhaktiyog

स्वामी राम को बंगाली बाबा ने वह दिया जिसे देने का कोई सोच भी नहीं सकता


गुरू के दिव्य कार्य हेतु शिष्य को मन, वचन और कर्म में बहुत ही पवित्र रहना चाहिये। गुरुभक्तियोग एक स्वतंत्र योग है।सद्गुरू के पवित्र चरणों में आत्मसमर्पण करना ही गुरुभक्तियोग की नींव है। अगर आपको सद्गुरू के जीवनदायक चरणो में दृढ श्रद्धा एवं भक्तिभाव होगा तो आपको गुरुभक्तियोग के अभ्यास में अवश्य सफलता मिलेगी।जब स्वामी …

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हम वो परवाने है जो शमा को देखकर कभी वापस नहीं लौटते…


जो अधिक वाचाल है और शरीर की टिपटाप करना चाहता है वह गुरु की इच्छा के अनुसार सेवा नही कर सकता। हर रोज भाव एवं भक्ति से गुरु की चरण कमलों की पूजा करो। अगर अलौकिक भाव से अपने गुरु की सेवा करना चाहता हो तो स्त्रीयों से एवं सांसारिक मनोवृत्ति वाले लोगों से हिलो …

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वह अदभुत अनोखा प्रेमी भक्त


जो नैतिक पूर्णता गुरु की भक्ति आदि के बिना ही गुरुभक्तियोग का अभ्यास करता है उसे गुरुकृपा नही मिल सकती। गुरुभक्तियोग का अभ्यास सांसारिक पदार्थों के प्रति वैराग्य और अनासक्ति पैदा करता है और अमरता प्रदान करता है । सद्गुरु के जीवन प्रदायक चरणों की भक्ति महापापी का भी उद्धार कर देती है । कल …

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