अगर आप शिष्य हैं तो यह कथा आपके लिए है ।
प्रत्येक विद्यार्थी के अंदर गुरू के प्रति अपनी विचित्र ही धारणा होती है । जब कोई किसी संत के पास जाता है तब वह उसके वास्तविक स्वरूप को देखने को तैयार नहीं होता । जब संत से आपकी आशाएं पूरी नहीं हो पाती तो आप निर्णय लेते हैं कि यह अच्छे संत नहीं हैं । …