Gurubhaktiyog

अगर आप शिष्य हैं तो यह कथा आपके लिए है ।


प्रत्येक विद्यार्थी के अंदर गुरू के प्रति अपनी विचित्र ही धारणा होती है । जब कोई किसी संत के पास जाता है तब वह उसके वास्तविक स्वरूप को देखने को तैयार नहीं होता । जब संत से आपकी आशाएं पूरी नहीं हो पाती तो आप निर्णय लेते हैं कि यह अच्छे संत नहीं हैं । …

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क्या आपने ईश्वर को देखा है? (सन्यासी का आध्यात्मिक सफर) भाग २


जब कोई व्यक्ति संसार मे सफलता हासिल करने निकलता है तो सभी रिश्तेदार उसका हौसला बढ़ाते हैं, जब तक किसी कला मे कुशल होने की कोशिश करता है तो सभी मित्र और शिक्षक उसे हिम्मत देते हैं, प्रोत्साहित करते हैं यदि आप मिस इंडिया या मिस यूनिवर्स बनने की कोशिश मे है तो आपके लिए …

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क्या आपने ईश्वर को देखा है?(सन्यासी का आध्यात्मिक सफर) भाग – १


गुरु प्रेम और करुणा की मूर्ति है, गुरु के प्रति भक्ति मे शिष्य के हृदय मे स्वार्थ की एक बूंद भी नही होनी चाहिए। गुरु के प्रति भक्ति अखुट और स्थायी होनी चाहिए, शरीर या चमड़ी का प्रेम वासना कहलाती हैं। जबकि गुरु के प्रति प्रेम भक्ति कहलाता है।ऐसा प्रेम.. प्रेम के खातिर होता है …

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