Gurubhaktiyog

गुरु रक्षा सूत्र हर शिष्य के लिए वरदान (वह जो आपकी हरपल रक्षा करेगा)


शिष्य के हृदय के तमाम दुर्गुनरूपी रोग पर गुरुकृपा सबसे अधिक असरकारक, प्रतिरोधक एवं सार्वात्रिक औषध है। जो गुरु भक्तियोग का अभ्यास करना चाहते हैं, उन्हें सब दिव्य गुणों का विकास करना चाहिए जैसे कि सत्य बोलना, न्याय परायणता, अहिंसा, इच्छा शक्ति, सहिष्णुता, सहानुभूति,स्वाश्रय, आत्मश्रद्धा, आत्म संयम, त्याग, आत्म निरक्षण, तत्परता, सहनशक्ति, विवेक, वैराग्य, हिम्मत, …

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आज इतिहास लिखा जाना था घटने वाला था कुछ अद्भुत


शास्त्र एवं गुरु द्वारा निर्दिष्ट शुभ कर्म करो, ब्रह्मवेता महापुरुष ही सच्चे संस्थापक होते है विश्व शांति की नींव का। किसी भी समाज या राष्ट्र की महानता उसकी संपत्ति, वित या वैभव से निर्धारित नहीं होती, समाज या राष्ट्र की महानता धर्म से निहित है और धर्म का प्राकट्य सत्शिष्य और सतगुरुओं की कृपा से …

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संत ने दिया था उसे गुप्त संकेत जिसे क्या वह समझ सका? (रोचक कथा)


एक जिज्ञासु महात्मा के पास गया और कहने लगा कि गुरु जी मैं कभी कभी निराश होता हूं, कभी कभी मुझे सामने वाले पर बहुत क्रोध आता है, कभी कभी मुझे लगता है कि मैं पैदा ही क्यों हुआ? मन शुब्ध हो जाता है, ऐसे समय पर मैं क्या करूं? गुरु जी कोई उपाय बताइए। …

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