गुरु रक्षा सूत्र हर शिष्य के लिए वरदान (वह जो आपकी हरपल रक्षा करेगा)
शिष्य के हृदय के तमाम दुर्गुनरूपी रोग पर गुरुकृपा सबसे अधिक असरकारक, प्रतिरोधक एवं सार्वात्रिक औषध है। जो गुरु भक्तियोग का अभ्यास करना चाहते हैं, उन्हें सब दिव्य गुणों का विकास करना चाहिए जैसे कि सत्य बोलना, न्याय परायणता, अहिंसा, इच्छा शक्ति, सहिष्णुता, सहानुभूति,स्वाश्रय, आत्मश्रद्धा, आत्म संयम, त्याग, आत्म निरक्षण, तत्परता, सहनशक्ति, विवेक, वैराग्य, हिम्मत, …