जिसमें संयम है सिखने की तड़प है और गुरुमंत्र पर विश्वास है उसे सफलता जरूर मिलती है।
द्रोणाचार्य के कुछ शिष्य सोचते थे कि अर्जुन पर गुरूजी की विशेष कृपा है। उन सभी को अर्जुन खटकता था। एक बार गुरू द्रोणाचार्य अर्जुन सहित अपने शिष्यों को लेकर नदी किनारे गये और एक वटवृक्ष के नीचे खड़े होकर बोले- बेटा अर्जुन! मैं आश्रम में अपनी धोती भूल आया हूँ जा! जरा ले आ। …