Gurubhaktiyog

जिसमें संयम है सिखने की तड़प है और गुरुमंत्र पर विश्वास है उसे सफलता जरूर मिलती है।


द्रोणाचार्य के कुछ शिष्य सोचते थे कि अर्जुन पर गुरूजी की विशेष कृपा है। उन सभी को अर्जुन खटकता था। एक बार गुरू द्रोणाचार्य अर्जुन सहित अपने शिष्यों को लेकर नदी किनारे गये और एक वटवृक्ष के नीचे खड़े होकर बोले- बेटा अर्जुन! मैं आश्रम में अपनी धोती भूल आया हूँ जा! जरा ले आ। …

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समर्थ गुरु व चतुर शिष्य की कथा आपको विवेकी बना देगी


अज्ञान का नाश करने वाले तथा ज्ञान देने वाले सतगुरु के चरण कमलों मे कोटि कोटि प्रणाम। समदर्शी संत महात्मा और गुरु के सत्संग का एक भी मौका चूकना नहीं। अपने स्थूल मन के कहे अनुसार कभी चलना नहीं। अपने गुरु के वचनों का अनुसरण कर उच्च आत्माओं एवम् गुरु के स्मरण मात्र से सांसारिक …

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प्रसंग काफी पुराना है जब बापूजी लाडोल गांव गए थे


गुरू कृपा से ही मनुष्य को जीवन का सच्चा उद्देश्य समझ में आता है और आत्म-साक्षात्कार करने की प्रबल अकांक्षा उत्पन्न होती है । शिष्य के हृदय के तमाम दुर्गुण रूपी रोग पर गुरू कृपा सबसे अधिक असर-कारक, प्रतिरोधक एवम् सार्वात्रिक औषध है । यदि कोई मनुष्य गुरू के साथ अखंड और अच्छिन्न संबंध बांध …

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