263 ऋषि प्रसादः नवम्बर 2014

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

बस भूल हटा दी कि आनंद


सम्पूर्ण विषयों में जो व्यापक है, सब विषयों का जो प्रकाशक, ग्रहण करने वाला है, सब विषयों को जो अपने में समेट लेता है (खा जाता है) और जिसका भाव सदा बना रहता है, उसको आत्मा कहते हैं। ये चारों बातें अपने (आत्मा) में हैं और यह आत्मा आनंदस्वरूप ही है। जहाँ अपने से भिन्न …

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निंदक का भल नाहीं…. – संत कबीर जी


हंसा निंदक का भल नाही। निंदक के तो दान पुण्य व्रत, सब प्रकार मिट जाहीं।। टेक।। ‘हे विवेकियो ! निंदक का कल्याण नहीं है। निंदक द्वारा किये गये दान, पुण्य, व्रत आदि सब निष्फल ही हो जाते हैं।’ जा मुख निंदा करे संत की, ता मुख जम की छाँही। मज्जा रूधिर चले निशिवासर, कृमि कुबास …

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जनता में जागृति की जरूरत है


श्री बी. एम. गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता पुलिस को अधिकार दिये गये हैं, पुलिस उनका उपयोग भी कर सकती है, दुरुपयोग भी कर सकती है। अगर कोई भी शिकायत किसी अच्छे आदमी के खिलाफ दाखिल होती है तो पहले पुलिस को जाँच करनी चाहिए कि क्या यह आरोप सही है ? बिना किसी जाँच के पुलिस …

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