ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरुसेवा क्या है एवं क्यों व कैसे करें ?


ब्रह्मवेत्ता सद्गुरु व्यापक ब्रह्मस्वरूप होते हैं । उनकी सेवा क्या है, कैसे करें व उसका क्या माहात्म्य है ? आइये जानते हां शास्त्रों व महापुरुषों के वचनों में- ऐसी है गुरुसेवा की महिमा ! भगवान ब्रह्मा जी देवर्षि नारद जी से कहते हैं- गुरुशुश्रुषया सर्व प्राप्नोति ऋषिसत्तम ।। ‘उत्तम ऋषि ! गुरुसेवा से मनुष्य सब …

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कैसी हो शिक्षा ?


बच्चे ही भविष्य के स्रष्टा हैं । वे ही भावी नागरिक हैं । वे ही राष्ट्र के भाग्य-विधायक हैं । उन्हें शिक्षित करो, अनुशासित करो, उचित ढाँचे में डालो । प्रत्येक बच्चे के भीतर उत्साह व साहस है । उसे अपने को व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करो । उनके उत्साह, साहस को कुचलो नहीं …

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बिना किसी शर्त के ईश्वर का दर्शन !


– स्वामी अखंडानंद जी सरस्वती जिसमें वैराग्य नहीं है वह अपने शरीर को सुरक्षित रखकर ईश्वर को देखना चाहता है । एक बाबू जी कहते थेः “मैं ईश्वर को तब मानूँगा जब वह मेरे सामने सम्पूर्ण सृष्टि का प्रलय करके फिर से सृष्टि बनाये ।” एक साधु ने पूछाः “ईश्वर प्रलय करेगा इसे आप कैसे …

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