ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

असली जीत किनकी होती है ? – पूज्य बापू जी


प्रेम के बिना  वास्तविक जीवन की उपलब्धि नहीं होती और वास्तविक जीवन जीने वाला व्यक्ति न भी चाहे तब भी उसके द्वारा हजारों-लाखों लोगों का शुभ हो जाता है, मंगल हो जाता है, कल्याण हो जाता है । जो निष्काम सेवा करता है वह स्वयं तो रसमय जीवन बिताता ही है, औरों के लिए भी …

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योगस्थः कुरु कर्माणि…..


अक्ष्युपनिषद् में भगवान सूर्यनारायण सांकृति मुनि से कहते हैं- “असंवेदन अर्थात् आत्मा-परमात्मा के अतिरिक्त दूसरी किसी वस्तु का भान न  हो – ऐसी स्थिति को ही योग मानते हैं, यही वास्तविक चित्तक्षय है । अतएव योगस्थ होकर कर्मों को करो, नीरस अर्थात् विरक्त हो के मत करो ।” इसी सिद्धान्त को सरल शब्दों में समझाते …

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अपने में हनुमान जी के गुण धारण करो


श्री हनुमान जयंतीः  कर्म को, भक्ति को योग बनाने की कला तथा ज्ञान में भगवद्योग मिलाने की कला हनुमान जी से सीख लो, हनुमान जी आचार्य हैं । लेकिन जिसके पास भक्ति, कर्म या योग करने का सामर्थ्य नहीं है, बिल्कुल हताश-निराश है तो…. ? ‘मैं भगवान का हूँ, भगवान की शरण हूँ….’ ऐसी शरणागति …

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