ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

किसको कहते हैं ऊँची पढ़ाई और तुच्छ पढ़ाई ? – पूज्य बापू जी


जिनके जीवन का लक्ष्य ऊँचा नहीं है वे हलकी इच्छाओं में, हलके दिखावों में, हलके आकर्षणों में खप जाते हैं । जीवन का कोई ऊँचा ध्येय बना लेना चाहिए और ऊँचे में ऊँचा ध्येय तो यह है कि जीवनदाता का अनुभव करें । अनंत ब्रह्मांडों का जो आधार है उसका साक्षात्कार करना ऊँचा लक्ष्य है …

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ब्रह्म-साक्षात्कार के लिए आओ करें अंतःकरण की शुद्धि


शुद्ध अंतःकरण युक्त मुमुक्ष वेदांत का अधिकारी है । अब अंतःकरण-शुद्धि के साधनों पर किंचित् विशेष विचार करते हैं । श्रुति कहती हैः आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः…। (छांदोग्यनोपनिषद् 7.26.2) अर्थात् आहार की शुद्धि से अंतःकरण की शुद्धि होती है । आद्य शंकराचार्य जी ने ‘आहार’ का अर्थ किया हैः ‘आहियत इत्याहारः शब्दादिविषयविज्ञानं….’ । भोक्ता के भोग के …

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मुक्तकेशी देवी के संस्कारों का प्रभाव


घुरणी गाँव (जि. नदिया, प. बंगाल) के रहने वाले गौरमोहन जी सदाचारी, सत्संगी, निष्ठावान तथा धर्मपरायण थे । उनकी पत्नी मुक्तकेशी देवी भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं । वे संतों के प्रति दृढ़ श्रद्धा रखती थीं व जप, पूजन आदि किये बिना जल तक नहीं लेती थीं । सरलता, दयालुता, सुशीलता, परोपकारिता, दीन-दुःखियों के …

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