शुभ संकल्प करने एवं सुसंग पाने का पर्वः उत्तरायण
भगवान के होकर आगे बढ़ो ! उत्तरायण का वाच्यार्थ यही है कि सूर्य का उत्तर की तरफ प्रस्थान । ऐसे ही मानव ! तू उन्नति की तरफ चल, सम्यक् क्रांति कर । सोने की लंका पा लेना अथवा बाहर की पदवियाँ ले लेना, मकान-पर-मकान बना के और कम्पनियों पर कम्पनियाँ खोलकर उलझना – यह राक्षसी …