हे मानव ! वृद्धावस्था आने से पहले तू चल पड़
भर्तृहरि जी महाराज वैराग्य शतक के 73वें श्लोक में कहते हैं कि “ढली अवस्था वाले बूढ़े पुरुष को अहो ! बड़ा कष्ट होता है। वृद्धावस्था में शरीर सिकुड़ गया, झुक गया, चाल धीमी पड़ गयी है और दाँतों की पंक्ति टूटकर गिर गयी। इस अवस्था में नेत्रज्योति नष्ट हो जाती है, बहरापन बढ़ जाता है …