कौन सी चर्चाएँ ग्राह्य और कौनसी त्याज्य ?
(गुरु हरगोविंदजी जयंतीः 10 जून 2017) एक दिन गुरु हरगोविंद जी के एक शिष्य ने प्रार्थना कीः “गुरुदेव ! हम गुरुभाईयों में शास्त्र चर्चा करते समय आपस में कोई विवाद उन्पन्न न हो इसका उपाय बताइये।” गुरु हरगोविंद जी ने समझाते हुए कहाः “चर्चाएँ भले चार प्रकार की होती हैं परंतु सज्जनों, बुद्धिमानों या गुरुभाइयों …