ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भगवान का अनुभव कैसे होता है ?


पूज्य बापू जी मेरे गुरुदेव कहते कि “भगवान की कसम खा के बोलता हूँ कि तुम रोज भगवान का दर्शन करते हो लेकिन “यही है भगवान” यह नहीं जानते। महापुरुष झूठ क्यों बोलेंगे ? अब तुम मान लो तो संशय टला, विश्रांति मिली और विश्रांति मिली तो पता चला कि “यह है”। यह जरूरी नहीं …

Read More ..

भगवान से बड़ा कौन व कैसे ? – स्वामी रामसुखदास जी


संत तुलसीदास जी कहते हैं राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा।। ‘श्रीरामचन्द्रजी समुद्र हैं तो धीर संत-पुरुष मेघ हैं। श्रीहरि चंदन के वृक्ष हैं तो संत पवन हैं।’ (श्री रामचरित. उ.कां. 119.9) भगवान श्रीकृष्ण भी दुर्वासा जी से कहते हैं- अहं भक्तपराधीनो ह्यस्वतन्त्र इव द्विज। साधुभिर्ग्रस्तहृदयो भक्तैर्भक्तजनप्रियः।। “मैं सर्वथा भक्तों के …

Read More ..

जीव-ब्रह्म का चल पड़ा खेल सद्गुरु ज्ञान के करते मेल


बाबा श्री भास्करानन्दजी अपनी गंगातट की कुटिया में बैठे भगवन्नाम जप कर रहे थे। माधवदास नामक एक जिज्ञासु ने बाबा जी को विनम्र भाव से प्रणाम करके पूछाः “महाराज जी ! क्या जीव कभी ब्रह्मपद को प्राप्त कर सकता है ? यदि कर सकता है तो कैसे ?” बाबा जी ने कहाः “कमरे की दीवाल …

Read More ..