ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

संसार असार है, सत्य तत्त्व ही सार है


भोगास्तुङ्गगतरङ्गभङ्गतरलाः प्राणाः क्षणध्वंसिन- स्तोकान्येव दिनानि यौवनसुखं स्फूर्तिः प्रियेष्वस्थिरा। तत्संसारमसारमेव निखिलं बुद्ध्वा बुधा बोधका लोकानुग्रहपेशलेन मनसा यत्नः समाधीयताम्।। ‘सांसारिक वस्तुओं के भोग से उत्पन्न सुख ऊँची उठने वाली लहरों के भंग के समान चंचल अर्थात् अस्थिर है। प्राण भी क्षण में नाश पाने वाले हैं। प्रियतम या प्रियतमा से संबंध रखने वाली यौवन की आनंद-स्फूर्ति भी …

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जब देवी ने सदगुरु के पास भेजा…


एक नंदी नामक ब्राह्मण था। उसके पूरे शरीर में कोढ़ हो गया था इसलिए वह तुलजापुर (महाराष्ट्र) की भवानी माता के मंदिर में गया और 3 वर्ष आराधना, प्रार्थना, जप करता रहा। एक दिन माता ने उसे स्वप्न में आदेश दिया कि ‘तुम चंदला परमेश्वरी के पास (गुलबर्गा, कर्नाटक) जाओ, वहाँ तुम्हारा काम बनेगा।’ ब्राह्मण …

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गुरुभक्ति से संकल्प-सामर्थ्य


संत मलूकदास जी के समय में एक बार बड़ा भारी अकाल पड़ा। पेड़ों में पत्तियाँ भी नहीं रह गयी थीं। पशु-पक्षी, मनुष्य – सब भूख से पीड़ित होकर प्राण विसर्जन करने लग गये। हजारों लोग एकत्र होकर संत मलूकदास जी की शरण गये और प्रार्थना कीः “महाराज ! आप समर्थ पुरुष हैं। आपकी करूणा हो …

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