ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

यही आत्मसाक्षात्कार है – पूज्य बापू जी


  (पूज्य बापू जी का 51वाँ आत्मसाक्षात्कार दिवसः 14 अक्तूबर 2015) प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः। अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते।।  (गीताः 3.27) प्रकृति में ही गुण कर्म हो रहे हैं लेकिन अहंकार से जो विमूढ़ हो गये, वे अपने को कर्ता-भोक्ता, सुखी-दुःखी मानते हैं। भाव आये तो मैं दुःखी हूँ या मैं सुखी हूँ यह आयेगा …

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पथ्य-अपथ्य विवेक


  आहार द्रव्यों के प्रयोग का व्यापक सिद्धान्त है- तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत स्वास्थ्यं येनानुवर्तते। अजातानां विकाराणामनुत्पत्तिकरं च यत्।। ‘ऐसे आहार-द्रव्यों का नित्य सेवन करना चाहिए, जिनसे स्वास्थ्य का अनुरक्षण (Maintenance) होता रहे अर्थात् स्वास्थ्य उत्तम बना रहे और जो रोग उत्पन्न नहीं हुए हैं उनकी उत्पत्ति भी न हो सके।’ (चरक संहिता, सूत्रस्थानम् 5.13) जो …

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जब मुनीमरूप में आये भगवान….


विसोबा का जन्म पंढरपुर से लगभग 80 कोस दूर आँढा नामक शिवक्षेत्र में यजुर्वेदी ब्राह्मणकुल में हुआ। इनके यहाँ सराफे का काम होने के कारण ये सराफ कहे जाते थे और घर सम्पन्न था। इनका सादा और पवित्र गृहस्थ-जीवन था। घर के कामकाज करते हुए भी इनका चित्त श्री विट्ठल में लगा रहता था। विसोबा …

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