ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

इक घड़ी न मिलते ता कलिजुगु होता….


  सिख समाज के पाँचवें गुरु अर्जुनदेव जी बचपन से ही धार्मिक कार्यों और सत्संगियों की सेवा में रूचि लेते थे। अर्जुनदेव अपने पिता गुरु रामदास जी से पिता के नाते उतना लगाव नहीं रखते थे, जितना गुरु के नाते रखते थे। एक भी क्षण के लिए वे अपने गुरु रामदास जी से दूर होना …

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कैसी भयंकर दुर्गति !


  श्री रामचरितमानस के उत्तरकांड में गरुड़ जी काकभुशुंडिजी से पूछते हैं- ‘कौन सा दुःख सबसे बड़ा है ? आप संत और असंत के मर्म (भेद) को जानते हैं, उनके सहज स्वभाव का वर्णन कीजिये। श्रुतियों में प्रसिद्ध सबसे महान पुण्य कौन-सा है और सबसे भयंकर पाप कौन सा है ? काकभुशुंडिजी कहते हैं- “हे …

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गौसेवा के आदर्शः पूज्य बापू जी


गोपाष्टमीः 8 नवम्बर 2016 गायों व गरीबों को दिया नवजीवन पूज्य बापू जी का गायों के प्रति प्रेम अभूतपूर्व है। उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए पूज्य श्री द्वारा किये गये सफल प्रयासों से गायों को नवजीवन मिला है। निवाई (राजस्थान) के बंजर इलाके में बापू जी ने गौशाला की स्थापना कराके ऐसे इलाके को …

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