मोक्ष की इच्छा है अत्यंत दुर्लभ
मनुष्य शरीर कितना दुर्लभ है। मनुष्य होकर मुमुक्षु होना, यह दूसरी दुर्लभ वस्तु है। ‘अवधूत गीता’ के प्रारम्भ में एक श्लोक है और यह श्लोक ‘खंडनखंडखाद्य’ में भी है।1 इसमें कहा है कि ईश्वर के अनुग्रह से ही मनुष्य के मन में अद्वैत की वासना का उदय होता है। यह बड़े-बड़े भयों से बचाती …