ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

मोक्ष की इच्छा है अत्यंत दुर्लभ


  मनुष्य शरीर कितना दुर्लभ है। मनुष्य होकर मुमुक्षु होना, यह दूसरी दुर्लभ वस्तु है। ‘अवधूत गीता’ के प्रारम्भ में एक श्लोक है और यह श्लोक ‘खंडनखंडखाद्य’ में भी है।1 इसमें कहा है कि ईश्वर के अनुग्रह से ही मनुष्य के मन में अद्वैत की वासना का उदय होता है। यह बड़े-बड़े भयों से बचाती …

Read More ..

पग-पग पर गुरुकृपा


‘श्रीमद्भागवत’ में गुरु-महिमा का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- “ज्ञानोपदेश देकर परमात्मा को प्राप्त कराने वाला गुरु तो मेरा स्वरूप ही है।” सभी महान ग्रन्थों ने गुरु महिमा गायी है। जिस ग्रंथ में गुरु महिमा नहीं वह तो सदग्रन्थ ही नहीं है। श्री रामचरितमानस (रामायण) में भी गुरु-महिमा पग-पग पर देखने को मिलती …

Read More ..

तीन प्रकार के शिष्य


तीन प्रकार के भक्त या शिष्य होते हैं। एक होते हैं आम संसारी भक्त, जो गुरुओं के पास आते हैं, उपदेश को सुनते हैं, कथा-वार्ताएँ सुनते हैं, जप-ध्यान करते हैं, कुछ-कुछ उनके उद्देश्यों को अपने जीवन में लाने का प्रयास करते हैं। ये सामान्य निगुरे आदमी से उन्नत तो होते जाते हैं लेकिन इससे भी …

Read More ..