ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

13 प्रबल शत्रुओं की उत्पत्ति और विनाश कैसे ?


एक बार युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछाः “पितामह ! क्रोध, काम, शोक, मोह, विधित्सा (शास्त्र विरुद्ध काम करने की इच्छा), परासुता (दूसरों को मारने की इच्छा), मद, लोभ, मात्सर्य, ईर्ष्या, निंदा, दोषदृष्टि और कंजूसी (दैन्य भाव) – ये दोष किससे उत्पन्न होते हैं ?” भीष्म जी बोलेः “महाराज युधिष्ठिर ! ये तेरह दोष प्राणियों …

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स्वास्थ्यरक्षक मट्ठा


यथा सुराणाममृतं सुखाय तथा नराणां भुवि तक्रमाहुः। ‘जिस प्रकार स्वर्ग में देवों को सुख देने वाला अमृत  है, उसी प्रकार पृथ्वी पर मनुष्यों को सुख देने वाला तक्र है।’ (भावप्रकाश) दही में चौथाई भाग पानी मिलाकर मथने से तक्र तैयार होता है। इसे मट्ठा भी कहते हैं। ताजा मट्ठा सात्त्विक आहार की दृष्टि से श्रेष्ठ …

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राष्ट्रीय स्तर पर लहराया संत श्री आशाराम जी गुरुकुल का परचम


  विद्यार्थियों की प्रतिभा विकसित करने के लिए शासन द्वारा देशभर में प्रतिवर्ष ‘गणित विज्ञान प्रदर्शनी’ का आयोजन होता है। इस प्रदर्शनी में पिछले 5 सालों से संत श्री आशाराम जी गुरुकुल, अहमदाबाद ने श्रेष्ठतम प्रदर्शन करते हुए पूरे भारत में गुरुकुल का परचम लहराया है। एक संक्षिप्त जानकारीः सत्र 2010-11 में गुरुकुल के विद्यार्थियों …

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