आध्यात्मिक खजाना भरने का सुवर्णकालः चतुर्मास
पूज्य बापू जी (27 जुलाई 2015 से 22 नवम्बर 2015 तक) चतुर्मास में किया हुआ व्रत, जप, संयम, दान, स्नान बहुत अधिक फल देता है। इन दिनों में स्त्री सहवास करने से मानव का पतन होता है। यही कारण है कि चतुर्मास में शादी-विवाह आदि सकाम कर्म नहीं किये जाते हैं। इन चार महीनों में …