समझ बिगड़ी तो सब बिगड़ा – पूज्य बापू जी
गुजराती भाषा में एक कहावत हैः चा बगड़ी तो सवार बगड़ी, शाक बगडयुं तो दिवस बगड्यो, अथाणुं बगड्युं तो वर्ष बगड्युं, अने बैरूं बगड्युं तो आखी जिंदगी बगड़ी। अर्थात् चाय बिगड़ी तो सवेरा बिगड़ा, सब्जी बिगड़ी तो दिवस बिगड़ा, अचार बिगड़ा तो पूरा वर्ष बिगड़ा और पत्नी बिगड़ी तो सारी जिंदगी बिगड़ी। यह पुरानी …