ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

प्रत्येक हिन्दू बालक को संस्कृत सीखनी ही चाहिए


महात्मा गाँधी शिक्षकों का प्रेम मैं विद्यालयों में हमेशा ही पा सका था। अपने आचरण के विषय में बहुत सजग था। आचरण में दोष आने पर मुझे रोना ही आ जाता था। मेरे हाथों कोई भी ऐसा काम, जिससे शिक्षकों को मुझे डाँटना पड़े अथवा शिक्षकों का वैसा ख्याल बने तो वह मेरे लिए असह्य …

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पुत्रवान भव राजन् – पूज्य बापू जी


राजा दिलीप को कोई संतान नहीं थी। वे गुरु वसिष्ठ के चरणों में गये और प्रार्थना कीः “गुरुवर ! ऐसा कोई उपाय बतायें जिससे मैं संतानप्राप्ति कर सकूँ।” गुरुवर वसिष्ठजी ने कहाः “राजन् ! आश्रम में रहकर नंदिनी गाय की सेवा करो। अगर उसकी सेवा से उसे संतुष्ट कर सको तो काम बन जायेगा।” गुरुवर …

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चार स्थान जहाँ सांसारिक बातें हैं वर्जित


चार जगहों पर सांसारिक बातें नहीं करनी चाहिए, केवल भगवत्स्मरण ही करना चाहिए। ये चार स्थान हैं- मंदिर, श्मशान, रोगी के पास, गुरु निवास श्मशान में कभी गये तो ‘तुम्हारा क्या हाल है ? आजकल धंधा कैसा चल रहा है ? सरकार का ऐसा है….’ ऐसी इधर-उधर की बातें न करें वरन् अपने मन को …

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