प्रत्येक हिन्दू बालक को संस्कृत सीखनी ही चाहिए
महात्मा गाँधी शिक्षकों का प्रेम मैं विद्यालयों में हमेशा ही पा सका था। अपने आचरण के विषय में बहुत सजग था। आचरण में दोष आने पर मुझे रोना ही आ जाता था। मेरे हाथों कोई भी ऐसा काम, जिससे शिक्षकों को मुझे डाँटना पड़े अथवा शिक्षकों का वैसा ख्याल बने तो वह मेरे लिए असह्य …