ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

संकल्प की दुनिया – पूज्य बापू जी


जितना कोई अच्छा काम करता है, उतना करने वाले का हृदय अच्छा होकर उसके भाग्य की रेखाएँ बदलती हैं, बुद्धि में परमात्मा के ज्ञान की और प्रेरणा की धारा विकसित होती है। बुरा कर्म करने से बुद्धि गलत निर्णय करने वाली बनती है। अच्छा कर्म करने वाले की बुद्धि भगवान ऊँची बना देते हैं। ऐसा …

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साकार और निराकार की बात – पूज्य बापू जी


संत लाल जी महाराज के प्रेम, भक्ति का भी कुछ प्रसाद लोगों को मिले इस हेतु मैंने एक बार नारेश्वर के अपने शिविर का उदघाटन उनके हाथों करवाया। इस प्रसंग पर उन्होंने कहाः “लोग निराकार की बातें करते हैं, ब्रह्मज्ञान की बातें करते हैं, ‘मैं ब्रह्म हूँ, तुम ब्रह्म हो’ – ऐसा ब्रह्मज्ञान का उपदेश …

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सदगुरु पकड़ाते ज्ञान की डोरी, करते भव से पार – स्वामी शिवानंद जी सरस्वती


साधकों के पथ-प्रदर्शन हेतु सदगुरु के रूप में भगवान स्वयं पधारते हैं। ईश्वरकृपा ही गुरु के रूप में प्रकट होती है। यही कारण है कि सदगुरु-दर्शन को भगवददर्शन की संज्ञा दी जाती है। गुरु भगवत्स्वरूप होते हैं, उनकी उपस्थिति सबको पवित्र करती है। ब्रह्मस्वरूप सदगुरु ही मानव के सच्चे सहायक मानव को मानव द्वारा ही …

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