ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

वाहवाही का गुरुर, कर दे योग्यता चूर-चूर


शिष्य के जीवन में जो भी चमक, आभा, विशेषता दिखती है, वह उसकी इस जन्म की या अनेकों पूर्वजन्मों की गुरुनिष्ठा की ही फल है। कभी-कभी प्रसिद्धि के शिखर पर चढ़ते-चढ़ते शिष्य मानने लगता है कि यह प्रतिभा खुद की है। बस तभी से उसका पतन शुरु हो जाता है। परंतु गुरुदेव ऐसे करूणावान होते …

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मंत्रशक्ति से अकाल दूर


मार्च माह में ऐरोली (मुम्बई) में आयोजित होली कार्यक्रम के दौरान मीडिया ने पूज्य बापूजी के लिए अनर्गल प्रलाप अलापा। इससे हमको बड़ा दुख हुआ। मंत्र-विज्ञान के लिए कुछ चैनलों ने जो चुनौती दी, उसे हम सब साधकों ने स्वीकार कर लिया। सातारा जिले (महा.) में खटाव तहसील पिछले दो सालों से सूखाग्रस्त है। यहाँ …

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पुण्यों का संचयकालः चतुर्मास


(19 जुलाई से 14 नवम्बर) (ʹपद्म पुराणʹ व ʹस्कन्द पुराणʹ पर आधारित) आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा द्वारा विश्रांतियोग का आश्रय लेते हुए आत्मा में समाधिस्थ रहते हैं। इस काल को चतुर्मास कहते हैं। इस काल में किया हुआ व्रत-नियम, साधन-भजन आदि अक्षय फल प्रदान करता …

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