ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

शिष्य को जोड़े सदगुरु सेः संप्रेषण शक्ति


पूज्य बापू जी शरीर का श्रृंगार तो रात को बिखर जाता है लेकिन अपने ʹमैंʹ का श्रृंगार तो मौत के बाद भी सुवास देता है। जैसे शबरी का शरीर तो मर गया लेकिन उसके श्रृंगार की सुवास अभी भी है। की बार शिष्यों को सपने में गुरु प्रेरणा देते हैं। कई बार ध्यान में प्रेरणा …

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शरीर शुद्धिकर फलः नींबू


नींबू अनुष्ण अर्थात् न अति उष्ण है, न अति शीत। यह उत्तम जठराग्निवर्धक, पित्त व वातशामक, रक्त, हृदय व यकृत की शुद्धि करने वाला, कृमिनाशक तथा पेट के लिए हितकारी है। हृदयरोगों को ठीक करने के लिए यह अंगूर से भी अधिक गुणकारी सिद्ध हुआ है। इसमें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध विटामिन ʹसीʹ शरीर की …

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विलक्षण है गुरुमंत्र की महिमा – पूज्य बापू जी


परमात्मा में जो महापुरुष बैठे हुए हैं, उनके वचन परमात्म-तत्त्व को छूकर निकलते हैं। वे वचन मंत्र होते हैं। उन वचनों का अंतर में मनन करने से जिज्ञासु साधकों का उत्थान होता है। मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा। ऐसा शास्त्रवचन है। मंत्र जपने में जितनी श्रद्धा होगी और जितना उसका अर्थ समझकर जपेंगे, उतना ही …

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