गुणों के चक्र से परे हैं आप !
पराशरजी अपने जिज्ञासु शिष्य मैत्रेय को संसार-चक्र से निकलने की सरल युक्ति बताते हुए कहते हैं- “हे शिष्य ! जैसे आकाश में सप्त ऋषियों से लेकर सूर्य, चन्द्र आदि नक्षत्र तथा तारामंडल का चक्र दिन रात घूमता रहता है परंतु ध्रुव तारा अचल, एकरस रहता है। यदि अन्य तारों की तरह ध्रुव भी चलायमान होता …