ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

परिप्रश्नेन


प्रश्नः बड़े में बड़ी बुराई क्या है ? पूज्य बापू जीः पराधीनता सबसे बड़ी बुराई है। प्रश्नः क्या भगवान के अधीन नहीं हों ? गुरु के अधीन नहीं हों ? पूज्य बापू जीः अरे ! भगवान और गुरु के अधीन होना यह सारी अधीनताओंको मिटाने की कुंजी है, वह अधीनता नहीं है। जैसे बच्चा माँ-बाप …

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नमकः उपकारक व अपकारक भी


शरीर की स्थूल से लेकर सूक्ष्मातिसूक्ष्म सभी क्रियाओं के संचालन में नमक (सोडियम क्लोराइड) महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोशिकाओं में स्थित पानी का संतुलन करना, ज्ञानतंतुओं के संदेशों का वहन करना वह स्नायुओं को आकुंचन-प्रसारण की शक्ति प्रदान करना ये सोडियम के मुख्य कार्य हैं। सामान्यतः एक व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 5-6 ग्राम नमक की …

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जानो उसको जिसकी है ʹहाँʹ में ʹहाँʹ – पूज्य बापू जी


संसार का सार शरीर है। शरीर का सार इऩ्द्रियाँ हैं। इन्द्रियों का सार प्राण हैं। प्राणों का सार मन है। मन का सार बुद्धि है। बुद्धि का सार अहं है, जीव है। जीव का सार चिदावली है और चिदावली का सार वह चैतन्य आत्मदेव है। उसी आत्मदेव से संवित् (वृत्ति) उठती है, फुरना (संकल्प) उठता …

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