ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सब देवों का देव – पूज्य बापू जी


मनमानी श्रद्धा होती है तो मनमाना फल मिलता है। और मन थोड़ी सीमा में ही होता है, मन की अपनी सीमा है। श्रद्धा सात्त्विक, राजस, तामस – जैसी होती है, वैसा ही फल मिलता है। आप किसी देवतो रिझाते हैं और फल चाहते हैं तो जैसे किसी मनुष्य को रिझाते हैं और फल चाहते हैं …

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प्रकृति भी तुम्हारी आज्ञा मानेगी


परब्रह्म परमात्मा की प्रसन्नता व संतुष्टि के लिए ही प्रकृति ने यह संसाररूपी खेल रचा है और जिनकी ब्रह्म में स्थिति हो जाती है, ऐसे महापुरुषों का संकल्पबल असीम होता है। ऐसे निरिच्छ महापुरुष कई बार सर्वमांगल्य के भाव से भरकर प्रकृति को बदलाहट के लिए आज्ञा देते हैं तो कई बार स्वयं प्रकृति ऐसे …

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जैसी नजर, वैसे नजारे – पूज्य बापू जी


जगत तुम्हें आधिभौतिक दिखता है उसकी परवाह नहीं लेकिन देखने का नजरिया तुम आध्यात्मिक करो। एक वैज्ञानिक को पीपल का पेड़ दिखा, वह बोलेगाः ʹपीपल का पेड़ है। इसकी लकड़ियों में ऐसा है – ऐसा है, यह गुण है, यह दोष है। इसके फर्नीचर से ऐसे-ऐसे फायदे होंगे या यह होगा। इसके धुएँ से यह …

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