ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

तीन दिव्य गुण, तीन महा अवगुण – पूज्य बापू जी


भगवान, आत्मदेव में तीन बातें ऐसी हैं कि और कहीं नहीं मिलेंगी। एक तो वह मरेगा नहीं। ब्रह्मलोक का नाश हो जायेगा, ब्रह्मा जी मर जायेंगे, इन्द्र मर जायेंगे परंतु भगवान मरेंगे नहीं। दूसरी बात क्या है, बिछुड़ेगा नहीं। हमारे से अलग होकर बिछुड़ के दिखावे ! हम नहीं जान रहे हैं तभी भी बिछुड़ा …

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शीतऋतु में स्वास्थ्य-संवर्धन


शीतकाल में तक्रपान-अमृत समान शीतकालेઽग्निमान्द्ये च कफवातामयेषु च। अरुचौ स्रोतसां रोधे तक्रं स्यादमृतोपमम्।। ʹशीतकाल में और अग्निमांद्य, कफ-वातजन्य रोग, अरुचि व नाड़ियों के अवरोध में तक्र (छाछ) का सेवन अमृत की तरह गुणकारी है।ʹ गाय के तक्र में विद्यमान आठ गुण क्षुधावर्धक, नेत्ररोगनाशक, बलकारक, रक्त-मांसवर्धक, कफ-वातशामक, आम (कच्चा आहार रस) नाशक। तक्र निर्माणः गाय के …

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सर्वांगीण शुद्धि द्वारा परम शुद्धि का साधनः गीता पूज्य बापूजी


गीता जयंतीः 23 दिसम्बर 2012 श्रीमद् भगवदगीता ने कमाल का भी कमाल कर दिया ! गीता यह नहीं कहती कि तुम ऐसी वेशभूषा पहनो, ऐसा तिलक करो, ऐसा नियम करो, ऐसा मजहब पालो। नहीं-नहीं, गीता (18-57) में आता है। बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चितः सततं भव। ʹसमबुद्धिरूप योग का अवलम्बन लेकर मेरे परायण और निरंतर मुझमें चित्तवाला हो।ʹ …

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