ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भगवान के वास्तविक स्वरूप को जानो


(आत्मनिष्ठ बापू जी के मुखारविंद से निःसृत ज्ञानगंगा) भगवान कहते हैं- मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युजन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ।। ‘हे पार्थ ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्तचित्त तथा अनन्यभाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्य आदि गुणों से युक्त, सबके आत्मरूप …

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मन का चिंतन ऊँचा करो-पूज्य बापू जी


एक होती है ‘आधि’, दूसरी होती है ‘व्याधि’ । मन के दुःखों को आधि बोलते हैं, शरीर के दुःखों को व्याधि बोलते हैं । जो आधि-व्याधि को सत्य मानता है और उनको अपने में थोपता है तो समझो वह अभी संसार का खिलौना है । मन में दुःख आये, चिंता आये तो बोलेः “मैं दुःखी …

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लक्ष्मी जी कहाँ ठहरती हैं और कहाँ से चली जाती हैं ?


‘देवी भागवत’ में कथा आती है कि जब देवराज इन्द्र राज्यहीन, श्रीहीन हो गये तो वे समस्त देवताओं सहित गुरुदेव बृहस्पति जी को साथ में लेकर ब्रह्मा जी के पास गये । देवगुरु बृहस्पति जी ने सारा वृत्तान्त ब्रह्मा जी को कह सुनाया । तब ब्रह्मा जी सबको लेकर भगवान नारायण के पास गये । …

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