ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

बुद्धि से परे है ईश्वर की सुन्दर व्यवस्था


(आत्ममाधुर्य से ओतप्रोत बापू जी की अमृतवाणी) एक तपस्वी ने 12 साल भजन किया । देखा कुछ हुआ नहीं, भगवान तो नहीं आये कोई ऋद्धि-सिद्धि भी नहीं आयी, लोक में इतनी पूजा-प्रतिष्ठा भी नहीं । ले तेरी कंठी, धर तेरी माला ! बाबा-बाबाओं का संग, एकांतवास, यह-वह सब छोड़ो । बोलते हैं कि एकांत में …

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भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य


धर्म के दस लक्षणः धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध । दस दिशाएँ- पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैर्ऋत्य, वायव्य, ईशान, अधः, ऊर्ध्व । दस इन्द्रियाँ- पाँच कर्मेन्द्रियाँ (हाथ, पैर, जिह्वा, गुदा, जननेन्द्रिय), पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (आँख, नाक, कान, जिह्वा, त्वचा) । दस महाविद्याः काली, तारा, छिन्न मस्ता, धूमावती, बगलामुखी, कमला, …

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अपने भक्त के कारणे राम तजउ निज रूप


(पूज्य बापू जी की मधुमय अमृतवाणी) मैं तो उन लोगों को धनभागी मानता हूँ जो भगवान के भक्त की सेवा करते हैं, संत का सत्संग सुनते हैं । महाराष्ट्र में परली बैजनाथ है । वहाँ एक भक्त रहते थे, जिनका नाम था जगन्मित्र । गाँव वालों ने उन्हें थोड़ी जमीन दी थी । उसी में …

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