सुख और यश में विशेष सावधान ! पूज्य बापू जी
सुख और दुःख, अनुकूलता और प्रतिकूलता प्रकृति व प्रारब्धवेग से आते है । फिर अंदर सुखाकार-दुःखाकार वृत्ति पैदा होती है । अनजान लोग उस वृत्ति से जुड़कर ‘मैं सुखी हूँ, मैं दुःखी हूँ’ ऐसा मान लेते हैं । अपने द्रष्टा स्वभाव को नहीं जानते । सुख आये तो बहुतों के हित में लगाना चाहिए, इससे …