ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

खुशी का मूल किसमें ? – पूज्य बापू जी


शरणानंद जी महाराज भिक्षा के लिए किसी द्वार पर गये तो उस घर के लोगों को उन्होंने बड़ा खुश देखा। महाराज ने पूछाः “अरे ! किसी बात की खुशी है बेटे-बेटियाँ ?” “महाराज ! क्या बतायें, आज तो बहुत मजा आ रहा है। बहुत खुशी हो रही है।” शरणानंद जीः “अरे भाई ! कुछ तो …

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अपनी समझ बढ़ाओ – पूज्य बापू जी


यह अलौकिक अर्थात् अति अदभुत त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी दुस्तर है परंतु जो पुरुष केवल मुझको ही निरंतर भजते हैं, वे इस माया को उल्लंघन कर जाते हैं अर्थात् इस संसार से तर जाते हैं।’ दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मामायमेतां तरन्ति ते।। (गीताः 7.14) हे अर्जुन ! मुझ अंतर्यामी आत्मदेव …

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संसार मुसाफिरखाना


भगवत्पाद स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज यह दुनिया सराय है। सराय में हर चीज से काम निकाला जाता है। वह किसी यात्री की निजी सम्पत्ति नहीं है। प्रत्येक यात्री जैसे सराय में थोड़े समय के लिए सुख लेकर तत्पश्चात् अपने-अपने देश को जाता है, वैसे ही हम जो धन, माल, परिवार देखते हैं, वह सब थोड़े …

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