ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

मनःस्थिति का परिमार्जन


पूज्य बापू जी की विवेकसम्पन्न अमृतवाणी स्वामी श्री अखण्डानंद जी महाराज का एक सत्संगी था। उसने बताया कि मुझे पुस्तक पढ़ने का बड़ा शौक था। मैं डॉक्टर बनने के लिए पुस्तकें पढ़ता था। एक दिन मैं ‘रोग के लक्षण एवं उसका इलाज’ पढ़ रहा था। पढ़ते-पढ़ते मुझे लगा कि इसमे रोग के जो भी लक्षण …

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हरि सेवा कृत सौ बरस, गुरु सेवा पल चार….


1703 ईस्वी में अलवर शहर से 8 कि.मी. के अंतर पर डेहरा गाँव में एक दिव्य आत्मा का अपतरण हुआ, नाम रखा गया – रणजीत। संसाररूपी रण को सचमुच जीतने वाला वह होनहार बालक रणजीत हीरा था। उनके चित्त में विवेक जगता कि खाना-पीना, रहना-सोना, मिलना-जुलना, आखिर बूढ़े होना और मर जाना… बस, इसके लिए …

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बड़ों की बड़ाई


पूज्य बापू जी ज्ञानमयी अमृतवाणी प्रयागराज में जहाँ स्वामी रामतीर्थ रहते थे उस जगह का  नाम रामबाग था। एक बार वे वहाँ से स्नान करने हेतु गंगानदी गये। उस समय के कोई स्वामी अखण्डानंद जी उनके साथ थे। स्वामी रामतीर्थ स्नान करके बाहर आये तो अखण्डानंद जी ने उन्हें कौपीन दी। नदी के तट पर …

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