ब्रह्मवेत्ता संत ही एकमात्र आश्रय
भगवान श्रीकृष्ण के विश्वहितकारी वचनामृत ‘श्रीमद् भागवत’ के 11वें स्कन्ध के 26वें अध्याय में एक कथा आती है। परम यशस्वी सम्राट इलानंदन पुरूरवा जब कुसंग में पड़कर उर्वशी में आसक्त हो गये तो उनका तप, तेज, प्रभाव सब जाता रहा। लेकिन जब उर्वशी उन्हें छोड़कर चली गयी तो पहले की पुण्याई के प्रभाव से पुरूरवा …