ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ब्रह्मवेत्ता संत ही एकमात्र आश्रय


भगवान श्रीकृष्ण के विश्वहितकारी वचनामृत ‘श्रीमद् भागवत’ के 11वें स्कन्ध के  26वें अध्याय में एक कथा आती है। परम यशस्वी सम्राट इलानंदन पुरूरवा जब कुसंग में पड़कर उर्वशी में आसक्त हो गये तो उनका तप, तेज, प्रभाव सब जाता रहा। लेकिन जब उर्वशी उन्हें छोड़कर चली गयी तो पहले की पुण्याई के प्रभाव से पुरूरवा …

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सदाचरण की प्रेरणा


एक अत्यंत सफल, प्रसिद्ध एवं लोकहित में रत महानुभाव दिखने में जरा कुरुप थे। वे सदा अपने पास एक दर्पण रखते थे और दिन में कई बार उसे हाथ में लेकर उसमें अपना चेहरा देखा करते थे। इससे देखने वालों के मन में यह जिज्ञासा बनी रहती थी कि ‘इस तरह बार-बार दर्पण देखने का …

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भगवान के भी काम आ जाओ – पूज्य बापू जी


जिन्होंने भगवान के सत्स्वभाव को पाया है, चैतन्य स्वभाव को पाया है, आत्मानंद स्वभाव को पाया है, ऐसे सद्गुरुओं के नजरिये से ही हमारी मान्यताओं के जाले कटते हैं। नहीं तो शास्त्र और सामाजिक व्यवस्था, हमारे रीति-रिवाज की व्यवस्था हमको ऐसे बंधनों में बाँध देती है कि उधर से निकले तो उधर फँसे, एक से …

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