ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

प्यार से पोषण करें सदगुणों का


महात्मा हरिद्रमुत गांधार देश की ओर जा रहे थे। मार्ग में एक ऐसा गाँव पड़ा जहाँ के सभी लोग बूढ़े, जवान, स्त्रियाँ और बच्चे भी भगवान को प्रेम करने वाले, भगवान की भक्ति करने वाले थे। चलते-चलते अचानक महाराज को एक बालक के रूदन की आवाज सुनायी दी। जरा रुककर सुना तो पता चला कि …

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परमात्मा का स्वभाव, स्वरूप और गुण क्या ? – (पूज्य बापू जी)


आप परमात्मा का स्वभाव जान लो, स्वरूप जान लो। बाप-रे-बाप ! क्या मंगल समाचार है ! क्या ऊँची खबर है ! भगवान के गुणों का ज्ञान उपासना में काम आता है। भगवान के स्वभाव का ज्ञान शरणागति में काम आता है और भगवान के स्वरूप का ज्ञान भगवान से एकाकार होने में काम आता है। …

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मन एक कल्पवृक्ष


(पूज्य बापू जी की पावन अमृतवाणी) कोई सुप्रसिद्ध वैद्यराज थे। रात्रि को किसी बूढ़े आदमी की तबीयत गम्भीर होने पर उन्हें बुलाया गया। वैद्यराज ने देखा कि ‘बूढ़ा है, पका हुआ पत्ता है, पुराना अस्थमा है, फेफड़े इन्कार कर चुके हैं, रक्तवाहिनियाँ भी चोड़ी हो गयी है, पुर्जे सब पूरे घिस गये हैं अब बूढ़े …

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