ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ज्ञान की दृष्टि बना लो


(ज्ञानसिन्धु पूज्य बापू जी की अमृतवाणी) जान लिया कीचड़ में कोई सार नहीं, जान लिया तरंग बनकर किनारों से टकराने में सार नहीं, अब तो मुझे जलराशि में ही अच्छा लगता है। भीड़भाड़ में विकारी लोगों के बीच रहना अच्छा नहीं लगता। एकांत में या तो फिर भगवान की मस्ती में जीनेवाले मस् साधकों के …

Read More ..

गणेष चतुर्थी या कलंकी चौथ


गणेष चतुर्थी को कलंकी भी कहते हैं। इस चतुर्थी को चाँद देखना वर्जित है। इस वर्ष गणेष चतुर्थी के दिन चन्द्रास्त का समय आश्रम के कैलेंडर में देखें । इस समय तक चन्द्रदर्शन निषिद्ध है। यदि भूल से भी चौथ का चन्द्रमा दिख जाये तो ‘श्रीमद् भागवत’ के 10 वें स्कन्ध के 56-57वें अध्याय में …

Read More ..

एक प्रसाद से कई प्रसाद


आज मेरी जिंदगी में जो भी खुशी है, सब पूज्य बापू जी की कृपा से मिली है। मेरे पिछले किसी जन्म के पुण्यकर्मों का फल है जो बापू जी की पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ मुझे मिली। इसे पढ़कर मेरे जीवन में आनंद और प्रसन्नता की बहार आ गयी। मेरी शादी को लगभग आठ साल होने को …

Read More ..