ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भोगों में चार दोष – पूज्य बापू जी


भोगों में चार दोष हैं । एक तो भोग सदा उपलब्ध नहीं रहते हैं । दूसरा उनको भोगने की रूचि भी सतत नहीं रहती है । तीसरा वे नष्ट हो जाते हैं और चौथा भोक्ता क्षीण होने लगता है । आदमी जितना अधिक भोग भोगेगा उतना बेचैन रहेगा, अशांत रहेगा, बिखरा हुआ रहेगा और उतना …

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घर से जाओ खाके तो बाहर मिले पका के


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) अंतर्यामी ईश्वर की शरण लेने से मनुष्य का अवश्य कल्याण होता है । उसके सहारे सब कार्य करने से मानव कार्य के बोझ से मुक्त हो जाता है । क्रिया का भार अपने ऊपर लेने से अहंकार की उत्पत्ति होती है, काम बिगड़ जाते हैं । जो सबसे बड़ा …

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‘मैं क्या करूँ ?’


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) कुछ लोग मेरे से पूछते हैं- ‘मैं क्या करूँ ? मैं क्या करूँ ?’ तो मुझे लगता है कि वे कितने भोले लोग हैं, अनजान हैं । जब दिन-रात स्पष्ट बोल रहा हूँ कि ऐसा चिंतन करो, ऐसा ध्यान करो फिर भी आकर पूछते हैं कि ‘मैं क्या करूँ …

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