ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

दैवी सम्पदा विकसित करो – पूज्य बापू जी


तुम अपने जीवन में आत्मतेज को जगाओ । जब तक तुमने आत्मतेज नहीं जगाया, तब तक भगवान में दृढ़ प्रीति नहीं होगी, तब तक मन का धोखा दूर नहीं होगा और चाहे कितना भी कुछ तुमने पाया लेकिन असली खजाना दबा-सा रह जायेगा इसलिए अपने जीवन में तेज लाओ । ‘भगवद्गीता’ के 16वें अध्याय के …

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गुरुतत्त्व – ब्रह्मलीन स्वामी शिवानंद जी


जिस प्रकार पिता या पितामह की सेवा करने ले पुत्र या पौत्र खुश होता है, इसी प्रकार गुरु की सेवा करने से मंत्र प्रसन्न होता है । गुरु, मंत्र एवं इष्टदेव में कोई भेद नहीं होता है । गुरु ही ईश्वर है । उनको केवल मानव ही नहीं मानना । जिस स्थान में गुरु निवास …

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ईश्वर दयालु है या न्यायकारी ?


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) जो व्यक्ति दयालु होता है वह ठीक से न्याय नहीं कर सकता और जो न्यायप्रिय होता है वह दया नहीं कर सकता । तब कई बार मन में होता है कि भगवान दयालु हैं कि न्यायकारी ? अगर दयालु हैं तो पापी पर भी दया करके उसको माफ कर …

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