ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

फुटपाथी नहीं, वास्तविक शांति


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) भगवान की भक्ति करने वाला, भगवान में प्रीति रखने वाला, गुरु की आज्ञा में चलने वाला व्यक्ति सुखी रहता है, सुख-दुःख में समचित रहता है, शांत रहता है और भगवान को, गुरु को, गुरु के ज्ञान को न मानने वाला सदैव दुःखी रहता है, अशांत रहता है । अशांतस्य …

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भक्तकवि संत पुरंदरदासजी


विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय का समकालीन श्रीनिवास नायक नाम का एक सेठ था, जो रत्नों का व्यापार करता था । उसके पास एक ब्राह्मण आया और बोलाः “सेठ जी ! मैंने अपनी कन्या की मँगनी कर दी है लेकिन अब शादी करने के लिए धन की जरूरत है इसीलिए आप जैसे सेठ के पास …

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ऐसी वाणी बोलिये….


एक राजकुमार था । वह बड़ा ही घमंडी और उद्दण्ड था । उसके मुँह से जब देखो तब कठोर वचन ही निकलते थे । लोग उसके दुर्व्यवहार से बहुत परेशान थे । राजा उसे बहुत समझाता लेकिन उस पर कुछ असर ही नहीं होता था । विवश होकर राजा एक दिन एक संत के पास …

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