ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

कर्म का फल


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) वृन्दावन में बलेदवदास जी महाराज हो गये । वे बहुत अच्छी सूझबूझ के धनी थे । वे सुबह तीन बजे उठते और वृन्दावन की प्रदक्षिणा करने के लिए निकल जाते तथा सूरज उगते-उगते वापस आते । एक दिन उन्होंने देखा कि कुछ लोग भंडारा कर रहे हैं । बलदेवदास …

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निष्ठावान बनो ! – पूज्य बापू जी


यदि निष्ठा दृढ़ हो तो कठिन-से-कठिन कार्य भी पूर्ण हो सकता है । इसी जन्म में परमात्मा के समग्र स्वरूप को पाने का दृढ़ संकल्प हो, अनन्य भाव हो तो वह भी पूर्ण हो जाता है । मनुष्य के पास दुःख मिटाने के लिए, शांति पाने के लिए, सफलता पाने के लिए उसकी निष्ठा पर्याप्त …

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सदोष और निर्दोष सुख


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) जिन-जिन लोगों ने पूर्व समय में मनुष्य जन्म पाकर समय, शक्ति का सदुपयोग नहीं किया है वे ही अभी वृक्ष, कीट-पतंग आदि योनियों में दुःखी, परेशान होते दिखायी देते हैं । भगवान ने हमें दुःखी बनाने के लिए थोड़े ही पैदा किया था ? शुद्ध सुख में हमारी गति …

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