गौरव भक्ति
(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) भगवान की भक्ति मुख्यतः दो तरह की होती है – गौरव भक्ति और संबंध भक्ति । वैसे भक्ति के कई अवांतर प्रकार हैं । हम पृथ्वी पर चलते हैं, दौड़ते हैं, कितना बढ़िया दौड़ते हैं लेकिन पृथ्वी नहीं होती तो कहाँ दौड़ते ? और पृथ्वी क्या हमारी बनायी हुई …