दुर्जन की करुणा बुरी, भलो साँईं को त्रास-पूज्य बापू जी
वसिष्ठ जी बोलते हैं- “हे राम जी ! यदि असाधु का संग साधुपुरुष भी करता है तो साधु भी असाधु होने लगता है और यदि साधुओं का संग असाधु कर ले तो असाधु भी साधु होने लगता है । जो परम साध्य साध रहे हैं वे ‘साधु’ हैं और जो अस्थिर संसार के पीछे समय …