ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

दुर्जन की करुणा बुरी, भलो साँईं को त्रास-पूज्य बापू जी


वसिष्ठ जी बोलते हैं- “हे राम जी ! यदि असाधु का संग साधुपुरुष भी करता है तो साधु भी असाधु होने लगता है और यदि साधुओं का संग असाधु कर ले तो असाधु भी साधु होने लगता है । जो परम साध्य साध रहे हैं वे ‘साधु’ हैं और जो अस्थिर संसार के पीछे समय …

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गुरुपूर्णिमा-संदेश


(गुरुपूर्णिमाः 8 जुलाई 2009) पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से गुरुपूर्णिमा जन्म-जन्मांतर से भटकते  हुए जीव में आचार्य के, भगवान के, शास्त्रों के वचनों से और जीव के अपने अनुभव से ज्ञान, भक्ति और योग का प्रसाद भरकर उसकी योग्यता को ऐसा कर देती है कि वह जीव फिर माता के गर्भों की पीड़ा सहने …

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शारीरिक शुद्धि


जितना ध्यान हम शरीर की पुष्टि की तरफ देते हैं, उतना ही ध्यान शरीर की शुद्धि की तरफ देना भी आवश्यक है । अवशिष्ट पदार्थों का निष्कासन करने वाली शोधन प्रणालियों का कार्य कुशलता से नहीं होगा तो पोषण तंत्र का कार्य अपने-आप मंद अथवा बंद हो जायेगा । शरीर से निष्कासन का कार्य मुख्यतः …

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