निद्रा-विचार
त्रय उपस्तम्भा इत्याहारः स्वप्नो ब्रह्मचर्यमिति । ‘आहार, निद्रा व ब्रह्मचर्य शरीर के तीन उपस्तंभ हैं अर्थात् इनके आधार पर शरीर स्थित है ।’ (चरक संहिता, सूत्रस्थानम्- 11.35) इनके युक्तिपूर्वक सेवन से शरीर स्थिर होकर बल-वर्ण से सम्पन्न व पुष्ट होता है । ‘निद्रा’ की महत्ता का वर्णन करते हुए चरकाचार्य जी कहते हैं- जब कार्य …