बंधन और मुक्ति कर्म से
(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) गुरुकृपा हि केवलं शिष्यस्य परं मंगलम् । गुरु की कृपा ही शिष्य का परम मंगल कर सकती है, दूसरा कोई नहीं कर सकता है यह प्रमाण वचन है । प्रमाण वचन को जो पकड़ता है वह तरता है । जो मन के अनुसार, वासना के अनुसार ही गुरु को …