ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

अपने घर में देख ! – पूज्य बापू जी


सूफी फकीर लोग कहानी सुनाया करते हैं कि प्रभात को कोई अपने खेत की रक्षा करने के लिए जा रहा था । रास्ते में उसे एक गठरी मिली । देखा कि इसमें कंकड़-पत्थर हैं । उसने गठरी ली और खेत में पहुँचा । खेत के पास ही एक नदी थी । वह एक-एक कंकड़-पत्थर गिलोल …

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सृष्टि कैसे बनी ?


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) सृष्टि के विषय में विचार करते-करते बहुत उच्चकोटि के महापुरुषों ने तीन विकल्प खोजे । पहला विकल्प था ‘आरम्भवाद’ । इसके अनुसार जैसे कुम्हार ने घड़ा बना दिया, सेठ ने कारखाना बना दिया, आरम्भ कर दिया, ऐसे ही ईश्वर ने दुनिया चलायी । कुम्हारा का बनाया हुआ घड़ा कुम्हार …

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अपनी डफली अपना राग


(परम पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) आत्मा के प्रमाद से जीव दुःख पाते हैं । आकाश में वन नहीं होता और चन्द्रमा के मंडल में ताप नहीं होता, वैसे ही आत्मा में देह या इन्द्रियाँ कभी नहीं हैं । सब जीव आत्मरूप हैं । वृक्ष में बीज का अस्तित्व छुपा हुआ है, ऐसे ही …

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